Fri, 01 May 2026
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क्या पूजा- पाठ करना अपने आप में स्वतन्त्र, निरपेक्ष कर्म है ? : योगीराज रमेश 

भोजन करना कोई कर्म नही कर्म करने के लिये आवश्यक उर्जा प्राप्त करने का साधन है इसी प्रकार पूजा पाठ करना धार्मिक उर्जा प्राप्त करने का साधन मात्र है : 

हरियाणा के फतेहाबाद में एक बाबा अश्लील कर्म के आरोप में पकड़ा गया है। उससे पूछा गया कि तुम आश्रम में क्या करते हो, तो उसका उत्तर था,- पूजापाठ करता हूँ। सुनकर हँसी आगयी।  उसका उत्तर ऐसे ही था जैसे किसी गृहस्थ से पूछा जाये कि तुम घर में बैठकर क्या करते हो और वह उत्तर दे कि मैं घर में बैठकर भोजन करता हूँ। अब  भोजन करना कोई कर्म नही कर्म करने के लिये आवश्यक उर्जा प्राप्त करने का साधन है। यदि कोई भोजन करके उसे पचाये और पचजाने पर फिर भोजन करे, फिर पचाये तो उसका कर्म जितना हास्यास्पद होगा उतना ही हास्यास्पद कर्म है ,सुबह साम मात्र पूजा करना।  पूजा पाठ करना धार्मिक उर्जा प्राप्त करने का साधन मात्र है। साध्य यह है कि धार्मिक उर्जा प्राप्त करके आप कर्म क्या करते हैं। आप की  धार्मिक उर्जा से समाज को क्या लाभ मिलता है। समाज का नैतिक स्तर गिरता जा रहा है। चोरी, छिनैती, डकैती, हिंसा बलात्कार की घटनायें बढ़ती जा रही हैं। हर आदमी बेइमान हो चुका है। दफ्तरों में रिश्वत और राष्ट्रीय सौदे में कमीशन लिया जा रहा है। इस अधर्म को रोकने का दायित्व राजनेताओं से अधिक साधु संतो का है। उपरोक्त सभी दुष्कर्म अधर्म के अन्तर्गत आयेंगे और अधर्म से लड़ना साधु संतो का काम है। भ्रष्टाचार, अपराध हाथ पकड़ने से नही मन पकड़ने से रुकते हैं।  मन पकड़ना, मन बदलना राजनेताओं का नही साधु संतो का काम है। छूटहिं मल कि मलहिं के धोये? प्रशासन और सरकारें स्वयं भ्रष्ट हैं फिर ये क्या भ्रष्टाचार मिटायेंगे। यह वह देश है जहाँ प्राथमिकी लिखाने और मुकदमें की तारीख पाने, दोनों के लिये घूस देना पड़ता है। पहले के जमाने में संत और सत्ता में जाम्बवान और हनुमान की तरह का तालमेल था। संतो की अंंगुलिनिर्देश पर सत्ता काम करती थी आज सत्ता के थाप पर अधिकांश संत नाचते हैं। आज ९०% संतो से आप पूछे कि आप क्या करते हैं तो वे उसी फतेहाबाद के बाबा की तरह उत्तर देंगे कि पूजापाठ करते हैं। आप का अपने आश्रम में बैठकर पूजापाठ करना उतना ही वैयक्तिक है जितना कि घरमें बैठकर किसी गृहस्थ का भोजन करना।आज के अधिकांश संतो का राजनीतिक सरोकार तो बहुत बढ़गया है पर उनका धार्मिक सरोकार लगभग शून्य हो गया है।


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