Thu, 06 Aug 2026
Post Details

भारतीय MSME निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा, UK FTA से राहत की उम्मीद पढ़ें पूरी खबर

टैरिफ का खतरा, UK FTA से राहत की उम्मीद

पढ़ें पूरी खबर 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) पर अमरीकी टैरिफ के असर को कम करने के लिए भारत अन्य देशों को निर्यात बढ़ा सकता है। इसके साथ फ्री ट्रेड एग्रीमैंट (एफटीए) का भी फायदा उठाकर ब्रिटेन को भी निर्यात बढ़ा सकता है। क्रिसिल इंटैलिजैंस की रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका द्वारा हाई टैरिफ लगाए जाने से एमएसएमई प्रभावित होंगे, जो भारत के कुल निर्यात का 45 प्रतिशत हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा कि अगर अतिरिक्त टैरिफ लागू किया जाता है, तो इसका कुछ क्षेत्रों पर काफी प्रभाव पड़ेगा।

क्रिसिल इंटैलिजैंस की एसोसिएट डायरैक्टर एलिजाबेथ मास्टर ने कहा, ‘भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, समुद्री भोजन, चमड़ा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे निर्यात केंद्रित क्षेत्रों में एमएसएमई के लिए सहायक है।’ मास्टर ने कहा कि रैडीमेड गारमैंट्स या आरएमजी को छोड़कर, अन्य का हिस्सा यूके के आयात में 3 प्रतिशत से भी कम है, फिर भी इस समझौते से बंगलादेश, कंबोडिया और तुर्की के मुकाबले एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और आरएमजी में चीन और वियतनाम पर बढ़त मिलेगी।

कपड़ा, रत्न एवं आभूषण और सीफूड इंडस्ट्री, जिसकी भारत से अमरीका को होने वाले कुल निर्यात में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है, सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में एमएसएमई की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है। रसायन क्षेत्र भी इससे प्रभावित हो सकता है, जहां एमएसएमई की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है। क्रिसिल इंटैलिजैंस के निदेशक पुशन शर्मा के अनुसार, हाई टैरिफ के कारण बढ़ी हुई उत्पाद कीमतों का आंशिक अवशोषण एमएसएमई पर दबाव डालेगा और यह उनके पहले से ही कम माजिर्न को और कम करेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी
हो जाएगी।

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 192062