Zomato से खाना ऑर्डर करना हुआ महंगा, Cash on Delivery पर देने होंगे ज्यादा रुपए
धीमी-धीमी आँच पर, ख्वाब पक रहे थे,
सर्द रातों में, चाँद तक रहे थे।
वक़्त की शाख़ों से पत्ते गिरे,
पर कोई मौसम रुका नहीं ...
हवा ने कानों में कहा ,
"चल, कोई दिया जला लेते हैं।"
राख से भी उठेगी चिंगारी,
ज़रा हाथ अपना बढ़ा लेते हैं।
उम्मीद— वो काग़ज़ की नाव सही,
बारिशों में भी तैरा करेगी।
जो दरिया में संग है हमारे,
वो मंज़िल तक पहुँचा देगी।
तो रात चाहे जितनी भी गहरी हो,
नया सवेरा हर दिन आएगा।
अंधेरा मिट जाएगा , यक़ीन रख ,
जहाँ उम्मीद होगी, उजाला भी वहीं आएगा।
*कंचन "श्रुता"*
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