झोटा हत्याकांड: मानसा पहुंचे पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, बोले- नशे के खिलाफ पूरा पंजाब एक हो
हवा में ठंडक बढ़ गई है,
कुछ रिश्ते भी ठिठुरने लगे हैं...
वो जो धूप-से चमकते थे,
अब धुंध में खोने लगे हैं।
बरसात की रातों में,
कुछ वादे भीगकर बह गए,
धूप आई तो देखा,
सूरज की किरणों में दरारें पड़ गईं।
एक कप चाय के साथ जो बातें पकती थीं,
अब ठंडी होती जा रही हैं,
वो खिड़की पर रखे पौधे की तरह,
जिसे धूप भी नसीब नहीं होती, और छाँव भी नहीं।
रिश्ते भी मौसमों की तरह होते हैं शायद,
कुछ बसंत से खिलखिलाते हैं,
तो कुछ पतझड़ में चुपचाप बिखर जाते हैं,
बिन आवाज़... बिन शिकायत...!
*कंचन "श्रुता"*




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