ਜਿਸ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਸ਼ਹਿਰ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਸੁਥਰਾ ਰੱਖਣ ਦੀ ਉਸਦੇ ਮੇਨ ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬਾਥਰੂਮਾਂ ਦਾ ਬੁਰਾ ਹਾਲ ਹੈ ।
छुरी का तीर का तलवार का तो घाव भरा
लगा जो ज़ख़्म ज़बाँ का रहा हमेशा हरा
इस्माइल मेरठी
गहरी सोचें लम्बे दिन और छोटी रातें
वक़्त से पहले धूप सरों पे आ पहुँची
आनिस मुईन
अजीब शख़्स था उस को समझना मुश्किल है
किनार-ए-आब खड़ा था मगर वो प्यासा था
खलील तनवीर
हाथ में देख कर तिरे मरहम
मेरे सीने का दाग़ हँसता है
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
मैनें मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है!
हाथ रख दे मिरी आँखों पे कि नींद आ जाए!!
वसीम बरेलवी
वो कौन था जो दिन के उजाले में खो गया
ये चाँद किस को ढूँडने निकला है शाम से
आदिल मंसूरी
इस क़दर मैं ने सुलगते हुए घर देखे हैं
अब तो चुभने लगे आँखों में उजाले मुझ को
कामिल बहज़ादी
लाज़िम नहीं हर बार तुझे हम हों मयस्सर
मुमकिन है तू इस बार हमें सच में गँवा दे
असमा फ़राज़






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