ਜਿਸ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਸ਼ਹਿਰ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਸੁਥਰਾ ਰੱਖਣ ਦੀ ਉਸਦੇ ਮੇਨ ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬਾਥਰੂਮਾਂ ਦਾ ਬੁਰਾ ਹਾਲ ਹੈ ।
मैं ने बचपन में अधूरा ख़्वाब देखा था कोई
आज तक मसरूफ़ हूँ उस ख़्वाब की तकमील में
आलम ख़ुर्शीद
हिज्र की रात और पूरा चाँद
किस क़दर है ये एहतिमाम ग़लत
अलीना इतरत
मार डाला तिरी आँखों ने हमें
शेर का काम हिरन करते हैं
हातिम अली मेहर
अब किसी भी मौत पर थोड़ा-सा मर जाते हैं हम
जीना आसाँ हो गया मरने की तय्यारी के बाद
- राजेश रेड्डी
तुझे किस बात का ग़म है वो इतना पूछ लें मुझ से
वो इतना पूछ लें मुझ से तो फ़िर किस बात का ग़म है
-मुशताक़ हुसैन ख़ान हाशमी मुश्ताक़
बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
मीर तक़ी मीर
अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता
न कुछ मरने का ग़म होता न जीने का मज़ा होता
चकबस्त बृज नारायण
नाकामियों ने और भी सरकश बना दिया
इतने हुए ज़लील कि ख़ुद्दार हो गए !
~ कर्रार नूरी






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