Sun, 03 May 2026
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शास्त्रों अनुसार, सत्ता को ग्रहण करना चाहिए और उसका धर्मानुसार ही पालन करना चाहिए :- योगिराज रमेश जी

सत्यम परम धीमहि
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धर्मेण राज्यं विंदेत धर्मेण परिपालयेत।
धर्ममूलां श्रियं प्राप्य न जहाति न हीयते।।

 राजा को धर्म अनुसार ही सत्ता को ग्रहण करना चाहिए और उसका धर्मानुसार ही पालन करना चाहिए। यानी सत्ता पाने की लिए और उस पर बने रहने के लिए गलत तौर-तरीके नहीं अपनाने चाहिए।
महाभारत में नायक या राजा के बारे में जगह-जगह नीति उपदेश है। भीष्म से लेकर विदुर तक और कृष्ण से ऋषि मुनि तक राजधर्म का रास्ता बताते हैं। सब एक मत हैं-सत्य ही धर्म की रक्षा कर सकता है (सत्येन रक्ष्यते धर्मो) और राजा का सत्यवादी होना अनिवार्य है।
महाकाव्य के राजधर्मनुशासन पर्व में कहा गया है: सत्य ऋषियों का सबसे बड़ा धन है और राजेंद्र कोई अन्य चीज लोगों का विश्वास उस तरह नहीं जीत सकती, जितना कि राजा के द्वारा बोला गया सच। दरअसल, झूठा राजा अधर्मी है, भ्रष्ट है और प्रजा का कभी भी प्रिय नहीं हो सकता।


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