सीधी जिले मे भ्रस्ट्राचार नही करने दूंगा चाहे पत्नी ही सरपंच क्यों न हो : यज्ञ नारायण तिवारी
कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणं
बह्वाशिनं निष्ठुरभाषिणं च ।
सूर्योदये चास्तमिते शयानं
विमुञ्चति श्रीर्यदि चक्रपाणिः।।
यदि कभी नारायण भी गंदा कपड़ा पहनने लगे गंदे रहने लगे अपना मुख साफ ना करें उस से दुर्गंध आने लगे बहुत ज्यादा खाने लगे निष्ठुर बोलने लगे आलसी हो जाएं सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सोने लगे। समझ लीजिए लक्ष्मी नारायण को त्याग देगी।।
तो इस श्लोक का इतना सा ही अर्थ है कि मनुष्य को आलसी नहीं होना चाहिए उद्योगी होना चाहिए।।


Comments
No comments yet.