Friday, 30 Jan 2026

संसार धार्मिक आडंबरों से कभी नहीं बदलता । जब बदलेगा तब धर्म के गंभीर अध्ययन से ही बदलेगा : योगिराज रमेश जी

                     ------ ।।धर्म।।--------


                    ज़रूरी है धर्म का अध्धयन


दुनिया के सारे धर्मो ने हजारों हजार वर्षों के अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाले हैं कि धर्म मनुष्य की आजादी की बात भले ही करता हो, लेकिन वही धर्म मानव जीवन को अनुशासित करने के लिए एक संविधान के होने का खास समर्थन भी करता है । यह संविधान जीवन के किसी एक हिस्से में नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जीवन में ही शामिल है। मौजूदा दौर में जहां धर्म के नाम पर पूरी दुनिया में ही झगड़ा प्रसाद हो रहे हैं , धर्म का दुरुपयोग हो रहा है, धर्म को राजनीति और शोषण का जरिया बनाया जा रहा है , यहां तक कि पूरी दुनिया में धर्म व्यापार में तब्दील हो चुका हो, ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता है कि धर्म का अध्ययन गंभीरतापूर्वक किया जाए। सच तो यह है अनेकानेक  धर्म को मानने वाले मानव समाज ने भी अभी तक धर्म को गहराई में जाकर ठीक प्रकार से समझा तक नहीं।  धर्म दर्शन धर्म का दार्शनिक विवेचन है और हम धर्म की अंधभक्ति को सच्चा धर्म मानने की भूल कर रहे हैं , जबकि धर्म जीवन है, जीवन का साध्य है लेकिन साधन बिल्कुल नहीं । 
           यह बात हमेशा पता चलेगी जब हम धर्म दर्शन का अध्ययन गंभीरता पूर्वक करेंगे । धर्म व्यापार ने धर्म के प्रति लोगों की आस्था को नकली बना दिया है। वह अपने हितों के लिए धर्म को केवल उतना ही समझना चाहता है जिससे उसके उद्देश्यों की पूर्ति होती रहे । अधिकतर धार्मिक लोग पाखंडों को धर्म का विकल्प मान बैठे हैं, जबकि धर्म मन और आत्मा की शांति के लिए है। धर्म शांति का प्रतीक है । जिस धर्म को अपनाने से अगर मन अशांत होता है तो वह धर्म नहीं है। और यह बात दुनिया के सिर्फ एक धर्म के लिए नहीं है बल्कि सभी धर्मों के लिए है। यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि धर्म अंतिम शक्ति है। यह जानकर आपको आश्चर्य होगा की धर्म भी देशकाल और परिस्थितियों के अनुसार बहुत धीरे-धीरे परिवर्तित होता रहता है। जो चीज आज जरूरी है, वह कल भी जरूरी होगी, धर्म ऐसा नहीं सोचता इसीलिए धर्म, विचारों के स्तर पर परिवर्तनों का स्वागत करता है और अपने आप को मानव जीवन की अनुकूलता में अपने को ढलता चलता है। धर्म का मतलब मनुष्य का कट्टरपंथी होना नहीं है। जो धर्म, मानव जीवन में आसानी से घुल- मिल जाता है, उसे धर्म के अनुयाई दुनिया में बहुत ज्यादा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मनुष्य दुनिया भर के धर्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन उसने आज तक धर्म दर्शन को ठीक प्रकार से समझा नहीं, इसीलिए जीवन में इतना भटकाव दिखाई देता है। 
        दुखद है कि धर्म को भी आज मनुष्य अपनी सुविधा से तोड़- मरोड़ रहा है और उसका उपयोग अपनी अनुकूलता में कर रहा है। धर्म का अध्ययन करने वाले सभी धर्मों में कम होते चले जा रहे हैं और धर्म को व्यापार बनाने वाले फलफूल रहे हैं। धर्म एक ऐसी ऊर्जा है जिसके होने पर कोई भी समाज अपने आप को शक्तिशाली महसूस करता है, सुरक्षित महसूस करता है । मानव समाज की हर इकाई धर्म के सानिध्य में ही स्वयं को मजबूत महसूस करती है लेकिन अफसोस है कि हम इस सच्चाई को भूल चुके हैं। धर्म से अलग होकर हम एक ऐसा संसार बना रहे हैं जो पाखंड पर खड़ा है इसीलिए छोटे से आक्रमण पर भी यह भरभरा कर गिर जाता है। धर्म के मूल संस्कारों में विकृतियां और विसंगतियां पैदा हो रही हैं। धर्म के चेहरे तेजी से बदल रहे हैं और अविश्वास बढ़ रहा है धर्म पर। मानव जीवन पाखंडों की गिरफ्त में है। इसी के चलते
मानव जीवन से, सर्वाधिक प्राचीन काल से जुड़ा होने के कारण धर्म दर्शन का अध्ययन आज के युग में और भी ज्यादा अपरिहार्य होता जा रहा है। इस पर शोध और विवेचना मानव जीवन को बचाने के सिलसिले में भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। धर्म का संबंध ही आज टूटे बिखरते जीवन को बड़ा सहारा दे  सकता है लेकिन दुख इस बात का है कि धर्म को लेकर पूरी दुनिया में गंभीर अध्ययन की कोई दशा दिशा नहीं दिखाई देती बल्कि विज्ञान के चिंतन के बावजूद लोग अंधविश्वासों में फंसते चले जा रहे हैं । भारत में भी बहुत से धर्म के मानने वाले लोग हैं लेकिन अधिकतर धर्म के अनुयायियों के पास धर्म के गंभीर अध्ययन की कोई वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं है बल्कि अधिकतर प्रतिशत ऐसे अनुयायियों का है जो धर्म के किसी भी सिरे को पड़कर उस पर भरोसा कर लेते हैं और फिर उसका दुरुपयोग शुरू हो जाता है।
            दुनिया का सबसे अधिक लोकप्रिय धर्म ईसाई धर्म है। इसकी दो बड़ी वजह मानी जाती है पहले कि इस धर्म की जटिलताओं धर्म के अध्ययन के बाद  बिल्कुल सामान्य कर दिया गया है । नतीजा यह है कि इसे अपना कर इस धर्म के रास्ते पर चलना बहुत आसान हो गया है । यह धर्म सिर्फ मानवता की बात करता है। इसके धर्म संविधान में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका निर्वाह साधारण से साधारण मनुष्य न कर सके। इस धर्म के अनुयायियों का पूरा विश्वास प्रभु ईसा मसीह पर है और उनका विश्वास है कि उनके जीवन का संचालन ईसा मसीह ही करते हैं। ईसाई धर्म के अध्ययन के लिए पूरी दुनिया में बड़े-बड़े सेंटर्स स्थापित किए गए हैं जहां धर्मगुरु इस धर्म की गहराई में उतरकर इसके मूल संविधान सिध्दांत और उद्देश्य को आज भी तलाश कर रहे हैं । उनके यहां धर्म, पूजा से ज्यादा अध्ययन का विषय है। अध्ययन से उनका तात्पर्य है अपनी खोज । वही मुस्लिम धर्म को लीजिए तो आप पाएंगे कि यह धर्म कुरान शरीफ के हिदायतनाम के अनुसार मानव जीवन को संचालित कर रहा है। इसमें कुछ अनुशासन है जिनका जिक्र कुरान शरीफ में मिलता है। उसी के जरिए जिंदगी को जीने का सलीक़ा सामने आता है। इस कट्टरपंथी सोच के बाद भी मुस्लिम धर्म दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा स्वीकार किया गया धर्म है । यह अलग बात है कि अलग-अलग लोगों में परिस्थितियों की अनुकूलता के अनुसार यह धर्म लचीला भी होता गया है इस धर्म में तमाम ऐसे धर्मगुरु है जो लगातार मुस्लिम धर्म के अध्ययन पर जोर देते हैं और उनकी कोशिश होती है कि वह धर्म के सही उद्देश्य को मानवता के हित में दुनिया के सामने ले जाएं। यह काम धर्म के अध्ययन के बिना संभव नहीं है । धर्म ,कर्म कांडों से जीवन जीने का सलीक़ा पैदा होता है लेकिन धर्म का अध्ययन धर्म के सच्चे ज्ञान को प्राप्त करने में हमारा सहयोग करता है।
           बौद्ध धर्म में भी सैकड़ों ऐसे धर्मगुरु है जो एक लंबे समय से बौद्ध धर्म का अध्ययन कर रहे हैं और उसकी गहराई से ऐसी बातें निकाल कर ला रहे हैं जो मानव समाज के लिए आज बहुत उपयोगी है । इनका भी भरोसा धर्म के अध्ययन पर है। 
            हिंदू धर्म भी दुनिया का एक बड़ा धर्म है लेकिन अफसोस  इस बात का है कि हिंदू धर्म के अधिकतर लोग कर्मकांड में उलझ कर रह गए हैं, अंधविश्वासों को धर्म मान बैठे हैं। ईश्वर की अंधभक्ति को हिंदू भाइयों ने ईश्वर प्राप्ति का साधन मान लिया है। हिंदू धर्म अकेला ऐसा धर्म है जिसमें हर हिंदू अपने अनुभव से धर्म को देखकर सुनकर उसका अंधा अनुकरण करता है और यह दिखाता है कि वह धर्म को सबसे अच्छी तरह समझता है । इसके चलते सच्चे मानव धर्म को बहुत चोट पहुंची है। हिंदू धर्म के सदा हितकारी रहे उद्देश्य इसके चलते हाशिये पर चले गए और एक नकली धार्मिक संकट पैदा हुआ जिसने मनुष्य को अकेला कर दिया।जबकि हिंदू धर्म ने हमेशा धर्म के अध्ययन पर जोर दिया। हिंदू धर्म के मूल उद्देश्यों को रेखांकित करने वाली सैकड़ो पुस्तकें, ग्रन्थ आज अपने अध्ययन का इंतजार कर रही है । बहुत कम ऐसे केंद्र है जहां हिंदू धर्म को एक जरूरी विषय मानकर समस्त मानवता के लिए इसका अध्ययन किया जा रहा हो ।
           हिंदू धर्म का सत्य प्रवचन ,कथावाचन और धार्मिक कर्मकांडों, उत्सवो और धार्मिक मेलाठेला तक सिमटकर रह गया है। अंधविश्वासियों का इस धर्म में बोलबाला है और धर्म का अध्ययन करने वाले धर्म गुरुओं को कोई पूछ नहीं रहा है । ये सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं। जहां-तहां धर्म के नाम पर इन्हें सजा दिया जाता है जबकि सच बात यह है कि वह धर्म मानवता की कोई सेवा नहीं कर सकता जिसका  धर्मगुरु और भक्त वैज्ञानिक अध्ययन नहीं करते। संसार धार्मिक आडंबरों से कभी नहीं बदलता । जब बदलेगा तब धर्म के गंभीर अध्ययन से ही बदलेगा ।
            हमें धार्मिक सेंटर्स स्थापित करने पर जोर देना चाहिए।मन और आत्मा को बदलने के लिए कोई और तरीका हो सकता है लेकिन दिमाग को बदलने के लिए धर्म का अध्धयन ज़रूरी है। इसके लिए यूनिवर्सिटीज की स्थापना की जानी चाहिए, अलग विभाग होना चाहिए शिक्षा केदो में, तब धर्म की भूमिका साकार होती दिखाई देगी। एक जरूरी और गंभीर विषय के रूप में इसके अध्ययन के लिए धर्मगुरु और धर्म की प्रति जिज्ञासु छात्रों को आमंत्रित करना चाहिए और उन्हें धर्म को पढ़ाने का अवसर देना चाहिए। वही धर्म स्वीकार होता है जो मानव जीवन का अध्ययन करना अपना धर्म समझता है। यह बात सिर्फ हिंदू धर्म के लिए नहीं है, उन सभी धर्म के लिए है जो धर्म के अध्ययन को लेकर कुछ विश्वासों के साथ ठहर गए हैं और उन्होंने अध्ययन बंद कर दिया है । बिना अध्ययन के धर्म किसी काम का नहीं।
**रमेश तांत्रिक


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