Saturday, 31 Jan 2026

"आज की इस राजनीति के दल बदल वाले इस मौसम में पार्टी के प्रति वफादारी की मिसाल है पार्षद सुरिंदर चौधरी"

पौड़ी वाले कॉंग्रेसी नेता, जिनका पंजा नहीं बल्कि हमेशा रहा पौड़ी चुनाव चिन्ह.... 

 

आज तिथि 7जुलाई 24 (विक्रांत मदान) : अमृतसर के पुतली घर वार्ड नंबर 2 के पार्षद सुरिंदर चौधरी दल बदलूयों के सामने एक वफादारी की मिसाल है, जी हां सुरिंदर चौधरी जोकि  पार्टी के लिए वफादारी की एक मिसाल है।

वह साल 1991 से लेकर साल 2024 आज तक कांग्रेस पार्टी के हक में डटे हुए है,जबकि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें हर बार टिकट देने से इंकार कर दिया आज भी वह जालंधर में हो रहे उपचुनावों के चलते रोजाना अमृतसर से जालंधर अपनी टीम के साथ  आ कर कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार सुरिंदर कौर तथा पार्टी के हक में घर घर जा कर वोट मांग रहे है।

बता दें की पार्षद सुरिंदर चौधरी  साल 1991 कांग्रेस पार्टी की टिकट ना मिलने पर बतौर आज़ाद उम्मीदवार चुनाव चिन्ह पौड़ी से पार्षद्  जीते और जीतने के बाद सुरिंदर चौधरी ने अपनी जीत कांग्रेस की झोली में डाल दी, साल 1997 में वार्ड 2 महिला के लिए आरक्षित सीट हो गई ,सुरिंदर चौधरी ने वह चुनाव अपनी धर्मपत्नी को लड़वाने की तैयारी की उन्होंने धर्मपत्नी  के लिए फिर कांग्रेस पार्टी से टिकट मांगा लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया, सुरिंदर चौधरी ने फिर से अपनी धर्मपत्नी को आज़ाद चुनाव चिन्ह पौड़ी से चुनाव लड़वाया और वह जीते और जीतने के बाद फिर सुरिंदर चौधरी ने जीत पार्टी कि झोली में डाली।

 साल 2002 फिर चुनाव आए सुरिंदर चौधरी ने अपने लिए कांग्रेस पार्टी से टिकट मांगा लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया फिर सुरिंदर चौधरी ने अपनी पौड़ी उठाई और आजाद चुनाव लड़ा, और जीतने के बाद अपनी जीत कांग्रेस पार्टी को सौंप दी, इतने ही नहीं उनको दूसरी पार्टियों से धमकी भरे फोन भी आए कई तरह के लालच भी दिए लेकिन सुरिंदर चौधरी अपनी कांग्रेस पार्टी से नहीं हिले, यही नहीं उन पर पर्चे भी दर्ज हुए जेल भी जाना पड़ा सजा भी हुई।

           साल 2007 में फिर चुनाव घोषित हुए सुरिंदर चौधरी ने पार्टी से टिकट मांगा पार्टी ने फिर टिकट से इंकार कर दिया फिर वही दौर दोहराया चौधरी आजाद लड़े और जीत गए जीतने पर उनकी पार्टी के प्रति ईमानदारी रही वो नही हिले उन्हों ने जीत कांग्रेस पार्टी को सौंप दी।

            साल 2012 में फिर दौर दोहराया चुनाव आए पर कांग्रेस पार्टी ने टिकट नहीं दिया लेकिन मानने वाले चौधरी साहिब कहा थे,अन्य पार्टियों से टिकट के ऑफर मिले टिकट के इलावा जो चाहिए वो भी मिलेगा की आफ़र के साथ साथ धमकियां भी मिली पर  सुरिंदर चौधरी कहाँ हारने वाले थे, ठीक पहले की तरह सुरिंदर चौधरी ने फिर पौड़ी उठाई और आज़ाद लड़े और वह पिछली बार की तरह चुनाव जीता और जीत फिर सीट कांग्रेस पार्टी को सौंप दी। 

इसे कहते है ईमानदारी की मिसाल एक तरफ कुर्सी के चक्कर में दल बदलू नेता और पार्टी के प्रति ईमानदारी की मिसाल सुरिंदर चौधरी खैर 2017 और 2022 में फिर वही उनको टिकट ना देना और उनका चुनाव जीत कर कॉंग्रेस पार्टी कॉं  अपनी सेवा और जीत अर्पित करना अपने आप में पार्टी में निष्ठा और समर्पण और पार्टी के प्रति वफादारी की अनूठी मिसाल है जो की मशाल की तरह पार्टी को हमेशा रोशन करती रही है।

             सुरिंदर चौधरी जो की साल 1991 से 2017 तक लगातार आजाद जीतते आ रहे है और अपनी जीत कांग्रेस पार्टी की झोली डाल रहे है।


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