Fri, 18 Sep 2026
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योगिराज रमेश द्वारा भगवत् गीता के श्लोक की व्याख्या ।

भगवद्गीता के 16वें अध्याय में 16.4 में भगवान कृष्ण कहते हैं

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च

क्रोधः परुष्यं एव च

अज्ञानं चाभिजातस्य

पार्थ सम्पदं आसुरीम

हे पृथापुत्र! अहंकार, अभिमान, क्रोध, दंभ, कठोरता और अज्ञान - ये गुण राक्षस प्रकृति के हैं।

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