Thursday, 29 Jan 2026

*पिंजरा* : डॉक्टर कंचन श्रुता

*पिंजरा*


अपने ही
ख़्वाबों को

 पिंजरा कर के
 बैठे थे 

परवाज़ का 
अरमान 
 दिल में लिए

अब

ख़्वाबों को
पंख लगाए 
नए सफ़र की 
उड़ान भरके
आसमान ....

    को छूना है  ।

*डॉ. कंचन "श्रुता"*


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