*पिंजरा*
अपने ही
ख़्वाबों को
पिंजरा कर के
बैठे थे
परवाज़ का
अरमान
दिल में लिए
अब
ख़्वाबों को
पंख लगाए
नए सफ़र की
उड़ान भरके
आसमान ....
को छूना है ।
*डॉ. कंचन "श्रुता"*
*पिंजरा*
अपने ही
ख़्वाबों को
पिंजरा कर के
बैठे थे
परवाज़ का
अरमान
दिल में लिए
अब
ख़्वाबों को
पंख लगाए
नए सफ़र की
उड़ान भरके
आसमान ....
को छूना है ।
*डॉ. कंचन "श्रुता"*
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