ਜਿਸ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਸ਼ਹਿਰ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਸੁਥਰਾ ਰੱਖਣ ਦੀ ਉਸਦੇ ਮੇਨ ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬਾਥਰੂਮਾਂ ਦਾ ਬੁਰਾ ਹਾਲ ਹੈ ।
*अजन्मी बेटी की वेदना*????
अर्शों से जब आई बेटी ,
कितने सपने लाई बेटी ,
कोख़ में गर बच भी गयी ,
क्यों जन्म के बाद भी
दी गई मारी बेटी ।
क्या बेटी होना कसूर है मेरा ,
क्यों कुचल दिए जज़्बात मेरे ,
जीवन दे के छीन लिए क्यों ,
नन्हे नन्हे ख़्वाब मेरे ।
मुझको भी गर मौका मिलता ,
जीवन सिंधु मैं तर लेती ,
खुद को मैं भी साबित करती ,
हां मैं भी इक जीवन जीती ।
बेटी से ही सम्भव है ,
रिश्तों की बौछार ,
बेटी है तो बहन है जग में ,
बेटी से ही माँ का दुलार ,
बेटी है तो दादी नानी ,
बुआ मौसी का प्यार ,
बेटी से सब रिश्ते नाते ,
बेटी से संसार ।
बिन बेटी न तीज त्योहार ,
न ही जीवन का उद्धार ,
बेटी है तो उत्सव जीवन ,
जैसे हर दिन हो साकार ,
बेटी है अभिमान पिता का ,
है मां की निश्छल साया ,
बेटी से ही है उजियारा ,
जो दो दो घरों में है आया ।
बिन बेटी न सम्भव होगा ,
जीवन दुनिया और संसार ,
बन्द हो भ्रूण हत्या और ,
हतियारों का ये कारोबार ,
बेटी का जो खिला न जीवन ,
मिलेगी कैसे माँ की ममता ,
और बहन - पत्नी का प्यार ।
बेटी है तो जीवन है बेटी से संसार ।
बेटी है तो जीवन है बेटी से संसार ।
*डॉ. कंचन "श्रृता"*






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