Wed, 01 Jul 2026

अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी 100 करोड़ हिंदुओं की आस्था पर आघात : सुप्रिया श्रीनेत

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की अध्यक्ष तथा प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस वार्ता में अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित घोटाले को लेकर केंद्र सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा आघात है। उनके अनुसार, यदि मंदिर में चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है, तो यह देश के धार्मिक विश्वास के साथ विश्वासघात है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के सामने आने के बाद सरकार ने जल्दबाजी में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन तो किया, लेकिन उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई। उनका कहना था कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी है, तो रिपोर्ट को जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच का उद्देश्य केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना और बड़े अधिकारियों को बचाना था।

सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 40 दिनों के भीतर मंदिर परिसर में 70 चोरी की घटनाएं दर्ज हुईं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतने कम समय में इतनी घटनाएं हुईं, तो पिछले कई वर्षों में कितनी अनियमितताएं हुई होंगी। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और धन की गिनती एवं बैंक में जमा करने की प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठाए। उनके अनुसार, इतनी बड़ी व्यवस्था में केवल छोटे कर्मचारियों के भरोसे इस प्रकार की घटनाएं संभव नहीं हैं और इसकी जिम्मेदारी वरिष्ठ स्तर तक तय होनी चाहिए।

उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय के इस्तीफे का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल इस्तीफा देने से जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और दान प्रबंधन में गंभीर खामियां थीं। साथ ही उन्होंने मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों का हवाला देते हुए निजी सुरक्षा एजेंसी की नियुक्ति और उससे जुड़े खर्चों पर भी सवाल उठाए।

प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारतीय स्टेट बैंक के साथ दान की गिनती और जमा करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई गई थी, लेकिन उसका पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि बैंक ने पहले ही कुछ कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश की थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी जमीन खरीद और अन्य मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी कहा कि कई दानदाताओं ने शिकायत की है कि उन्हें दान की रसीदें नहीं मिलीं या दान की गई वस्तुओं का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न समाजों और श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई सोने-चांदी की वस्तुओं और अन्य बहुमूल्य सामग्री के संबंध में भी कई सवाल उठ रहे हैं। अंत में उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा सरकार और संबंधित ट्रस्ट इस मामले में जनता को स्पष्ट जवाब दें।


730

Share News

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 170242