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जालंधर प्रशासन और पटाखा कारोबारियों के बीच लंबे समय से चल रही कशमकश और अनिश्चितता के बाद आखिरकार राओवाली (पठानकोट बाईपास) में पटाखा मार्केट स्थापित हो गई है। मार्केट सजने के साथ ही दुकानों पर आतिशबाजी की आधिकारिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है और खरीदार बाजार में पहुंचने लगे हैं। हालांकि, तैयारियों और लाइसेंस प्रक्रिया में हुई भारी देरी के कारण व्यापारियों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है।
3 दिनों में करोड़ों का स्टॉक बेचने की चुनौती
पटाखा व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन और कागजी प्रक्रियाओं में देरी के चलते धनतेरस के दिन जाकर दुकानें सज पाई हैं। अब दिवाली के त्योहार में महज 3 दिन का समय बचा है, और इतने कम समय में करोड़ों रुपये का पटाखा स्टॉक बेचना उनके लिए एक बेहद कठिन चुनौती बन गया है। व्यापारियों का तर्क है कि यदि प्रशासन समय रहते लाइसेंस जारी करता और जगह की अनुमति देता, तो उन्हें इस प्रकार की आर्थिक चिंता का सामना नहीं करना पड़ता।
कोर्ट केस और प्रशासनिक देरी ने बढ़ाया संकट
पटाखा कारोबारी विकास भंडारी ने व्यापारियों का पक्ष रखते हुए बताया कि दुकानदारों को पूरे साल इस प्रमुख त्योहारी सीजन का इंतजार रहता है, लेकिन हर बार दुकानें हासिल करने के लिए उन्हें भारी मशक्कत करनी पड़ती है। इस बार स्थानीय सरपंच द्वारा जगह के मालिकाना हक को लेकर अदालत में केस दायर करने के कारण लाइसेंस आवंटन में और अधिक विलंब हो गया। कारोबारियों ने मांग की है कि प्रशासन को व्यापारियों के हितों की सुरक्षा के लिए पटाखा मार्केट की व्यवस्था नियमित और स्थायी रूप से करनी चाहिए।
केवल 'ग्रीन पटाखों' की बिक्री पर ही ध्यान
पर्यावरण और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इस बार व्यापारियों ने पूरी तरह से 'ग्रीन पटाखों' की बिक्री पर ही तवज्जो दी है। मुख्य पटाखा निर्माण इकाइयों में अब बड़े पैमाने पर केवल ग्रीन पटाखे ही तैयार और सप्लाई किए जा रहे हैं। इसी कारण जालंधर की इस मार्केट में भी केवल स्वीकृत ग्रीन पटाखे ही ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।


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