दिल्ली में हाल ही में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिवारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी पीड़ा साझा की। परिवारों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी हिंसा का शिकार हुए, लेकिन उनकी स्थिति और संघर्ष पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
'मेरे पिता को भीड़ ने घेर लिया था'
दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उनके पिता पर भीड़ ने हमला कर दिया। उनके अनुसार, बैरिकेड के पास ड्यूटी कर रहे उनके पिता को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और कुछ समय के लिए बेहोश भी हो गए।
खून से सनी हुई वर्दी में पिता घर पहुंचे
परिवार ने बताया कि 25 जुलाई को हुई घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। बेटी ने कहा कि जब रात में उनके पिता घर लौटे तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी। उनका आरोप है कि सोशल मीडिया पर उनके पिता की गलत तस्वीर पेश की गई, जबकि वे केवल अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि घायल होने के बावजूद उनके पिता ने छात्रों के खिलाफ कोई अनुचित टिप्पणी नहीं की।
पत्थरबाजी में घायल हुए दूसरे पुलिस अधिकारी
एक अन्य पुलिस अधिकारी की पत्नी सीमा ने भी अपने पति के साथ हुई घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके पति लंबे समय से दिल्ली पुलिस में सेवा दे रहे हैं और प्रदर्शन के दौरान कथित पत्थरबाजी में घायल हुए। उनके पति ने सुबह ही फोन पर बताया था कि प्रदर्शन स्थल पर भीड़ लगातार बढ़ रही है और माहौल तनावपूर्ण है। कुछ समय बाद उन्हें सूचना मिली कि उनके पति घायल हो गए हैं और अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
'हेलमेट टूट गया, बड़ा हादसा हो सकता था'
सीमा ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर पत्थर, जूते और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं। उन्होंने बताया कि उनके पति का हेलमेट पत्थर लगने से टूट गया। यदि हेलमेट न होता तो सिर में गंभीर चोट लग सकती थी। सरकार और संसद से अपील की कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।





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