पंजाब में सामान्य से 28 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण धान की खेती प्रभावित होने लगी है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और डीजल पंपों का अधिक इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार पर भी असर पड़ सकता है।
राज्य के कई इलाकों में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी की कमी देखी जा रही है। कुछ स्थानों पर खेतों में दरारें तक पड़ गई हैं। किसानों का कहना है कि लगातार सिंचाई के बावजूद पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जबकि बिजली आपूर्ति में अनियमितता के कारण उन्हें डीजल जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उत्पादन लागत में लगातार इजाफा हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई का महीना धान की फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि आने वाले दिनों में सामान्य बारिश नहीं हुई तो धान की उपज प्रभावित हो सकती है। इसका असर किसानों की आय के साथ-साथ कृषि उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका है। मौसम विभाग ने भी जुलाई में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है, जिससे कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ गई है।





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