Tue, 02 Jun 2026

AAP विधायक रमन अरोड़ा की बढ़ीं मुश्किलें, मनी लॉन्ड्रिंग केस में जांच तेज

जालंधर में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक Raman Arora सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष पेश हुए। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए ईडी ने उन्हें समन जारी किया था, जिसके बाद वह जालंधर स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उनकी एक वीडियो भी सामने आई है, जिसमें कार्यालय में प्रवेश से पहले अधिकारियों द्वारा उनका मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान जमा करवाया जाता दिखाई दे रहा है।

आय से अधिक संपत्ति मामले से जुड़ी जांच
जानकारी के अनुसार, ईडी की जांच आय से अधिक संपत्ति के उस मामले से संबंधित है, जिसमें विधायक रमन अरोड़ा को पहले ही पंजाब विजिलेंस ब्यूरो गिरफ्तार कर चुका है। रमन अरोड़ा Jalandhar Central विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी चार्जशीट में उन पर जालंधर में दुकानदारों और अन्य प्रतिष्ठानों से कथित वसूली करने के आरोप लगाए हैं।

विजिलेंस की FIR के आधार पर ED की कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर को आधार बनाते हुए ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की है। इसी सिलसिले में विधायक को 2 जून को जांच में शामिल होने और अपना बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया गया था।

1.10 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति का आरोप
विजिलेंस ब्यूरो की जांच कथित तौर पर विधायक के पास 1.10 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति होने के आरोपों पर केंद्रित है। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भी भेजा गया था। जांच एजेंसियां उनकी आय और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं।

गैर-कानूनी नोटिस और रिश्वत मांगने के आरोप
विजिलेंस जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि रमन अरोड़ा ने असिस्टेंट टाउन प्लानर (ATP) सुखदेव वशिष्ठ के साथ मिलकर कुछ भवन मालिकों को गैर-कानूनी नोटिस जारी करवाए। आरोप है कि सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई का डर दिखाकर मामलों को निपटाने के बदले कथित रूप से रिश्वत मांगी गई थी। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

पहले भी दर्ज हो चुका है रंगदारी का मामला
अधिकारियों के अनुसार, जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने पिछले वर्ष 23 अगस्त को रमन अरोड़ा के खिलाफ कथित रंगदारी मांगने का मामला भी दर्ज किया था। बाद में 22 सितंबर को जालंधर की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। अब ईडी की जांच के बाद इस पूरे मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।


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