Thu, 22 Oct 2026
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एक ही रूट, अलग-अलग किराया क्यों?" - एयरलाइंस की टिकट दरों पर शीर्ष अदालत ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने देश में हवाई यात्रा के आसमान छूते किराए और एयरलाइंस की मनमानी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि यह काफी अजीब है कि एक ही दिन और एक ही सेक्टर में उड़ान भरने वाली अलग-अलग एयरलाइंस के किराए में इतना बड़ा अंतर होता है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि इस विसंगति को जल्द से जल्द सही किया जाना चाहिए ताकि आम यात्रियों को किराए में बड़ी राहत मिल सके।

स्वतंत्र रेगुलेटर बनाने की उठी मांग
यह पूरी सुनवाई सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर की गई एक याचिका पर आधारित थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह दलील दी कि भारत में एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर की तत्काल आवश्यकता है। उनका कहना है कि यह रेगुलेटर न केवल एयरलाइनों के मूल किराए की निगरानी करे, बल्कि उनके द्वारा वसूले जाने वाले विभिन्न अतिरिक्त शुल्कों पर भी कड़ी नजर रखे। याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया कि खास मौकों पर हवाई किराया अक्सर 300 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाता है, जिससे यात्रियों का बजट बिगड़ जाता है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट की रोचक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब याचिकाकर्ता ने किराए में 300% की भारी बढ़ोतरी का जिक्र किया। इस पर बेंच ने हल्के-फुल्के अंदाज में मजाक करते हुए कहा कि कई बार तो वकीलों की फीस भी 400 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, ऐसे में अब क्या किया जाना चाहिए। हालांकि, इस मजाकिया टिप्पणी के बावजूद अदालत ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया और केंद्र सरकार से इस पूरे मुद्दे पर विचार करने को कहा ताकि एयरलाइंस की इस मनमानी पर लगाम लगाई जा सके।

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