Fri, 15 May 2026
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बच्चा मिट्टी, चूना क्यों खाता है?इसे पिका कहते हैं ?

अगर आपका 1 से 6 साल का बच्चा ऐसी चीजें मुंह में डालता है जिनका खाना नहीं बनता, जैसे मिट्टी, दीवार का चूना, खड़िया, कागज, रबर, बर्फ, बाल, तो आप अकेले नहीं हैं। मेडिकल भाषा में इस आदत को पिका डिसऑर्डर कहते हैं। 

 

बच्चे को डांटना इसका हल नहीं है। असल में यह बच्चे के शरीर का एक सिग्नल है कि अंदर कुछ गड़बड़ है।

 

*पिका की पहचान कैसे करें?*

पिका तब माना जाता है जब:

1. बच्चा 2 साल से बड़ा हो।

2. लगातार 1 महीने या ज्यादा समय से नॉन-फूड चीजें खा रहा हो।

3. यह आदत उसकी उम्र या कल्चर के हिसाब से नॉर्मल न हो।

 

2 साल से छोटे बच्चों का चीजें मुंह में डालना नॉर्मल है। वो दुनिया को टेस्ट करके समझते हैं।

 

*इसके मुख्य कारण*

 

1. *शरीर में पोषण की कमी: सबसे बड़ी वजह*  

    जब बच्चे के शरीर में आयरन या जिंक की कमी हो जाती है, तो दिमाग उसे मिनरल वाली चीजों की तरफ खींचता है। मिट्टी-चूने में मिनरल होते हैं, पर शरीर उन्हें सोख नहीं पाता। इसलिए कमी पूरी नहीं होती और आदत बनी रहती है। खून की कमी यानी एनीमिया वाले 50% से ज्यादा बच्चों में पिका देखा गया है।

 

2. *पेट में कीड़े (Worm Infection)*  

    राउंडवर्म, हुकवर्म जैसे कीड़े बच्चे के खाने का सारा पोषण खुद खा जाते हैं। बच्चा भूखा रह जाता है और शरीर में कमजोरी आ जाती है। इसी कमी को पूरा करने के लिए वो मिट्टी खाने लगता है। विडंबना ये है कि मिट्टी से ही और कीड़े पेट में चले जाते हैं।

 

3. *मेंटल और डेवलपमेंटल कारण*  

    कई बार तनाव, घर में उपेक्षा, माता-पिता का ध्यान न मिलना, या ऑटिज्म, बौद्धिक विकास में देरी जैसी स्थितियों में भी बच्चे पिका दिखाते हैं। यहां बच्चा स्ट्रेस कम करने के लिए ऐसा करता है।

 

*मिट्टी-चूना खाना खतरनाक क्यों है?*

यह सिर्फ गंदी आदत नहीं है। इसके गंभीर नुकसान हैं:

 

- *दिमाग पर असर*: पुरानी दीवारों के पेंट में *लेड* होता है। लेड बच्चे का IQ कम कर देता है और सीखने की क्षमता पर असर डालता है।

- *पेट में गंभीर इन्फेक्शन*: मिट्टी में टॉक्सोकारा, ई. कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया और परजीवी अंडे होते हैं जो डायरिया, उल्टी और बुखार देते हैं।

- *आंतों में रुकावट*: रबर, प्लास्टिक, कपड़ा, बाल जैसी चीजें पेट में जमकर ब्लॉकेज कर देती हैं। ये मेडिकल इमरजेंसी है और ऑपरेशन तक की नौबत आ सकती है।

- *दांत और मुंह खराब*: पत्थर, ईंट चबाने से बच्चों के दूध के दांत टूट जाते हैं या घिस जाते हैं। मुंह में छाले भी हो जाते हैं।

- *पेट दर्द और कब्ज*: न पचने वाली चीजें पेट में दर्द और लगातार कब्ज का कारण बनती हैं।

 

*माता-पिता क्या करें? 5*

 

1. *डांटें नहीं, डॉक्टर को दिखाएं*  

    सबसे पहला काम बाल रोग विशेषज्ञ से मिलना है। डॉक्टर *CBC, Serum Ferritin, Serum Iron, Zinc Level, Stool Test* कराने को कहेंगे। इससे असली कारण पता चलेगा।

 

2. *समय पर डीवर्मिंग कराएं*  

    भारत में डॉक्टर हर 6 महीने में 1 साल से बड़े बच्चों को पेट के कीड़े की दवा देने की सलाह देते हैं। दवा का नाम और डोज डॉक्टर ही तय करेंगे।

 

3. *आयरन और जिंक से भरपूर खाना दें*  

    बच्चे की थाली में ये चीजें रोज शामिल करें:  

    *आयरन के लिए*: पालक, चुकंदर, अनार, सेब, खजूर, गुड़, राजमा, काले चने, बाजरा, रागी, अंडे की जर्दी, मीट।  

    *जिंक के लिए*: कद्दू के बीज, तिल, मूंगफली, दालें, दही।  

    *टिप*: आयरन वाले खाने के साथ नींबू, संतरा, आंवला दें। विटामिन C आयरन को 3 गुना ज्यादा सोखने में मदद करता है। दूध आयरन के साथ न दें।

 

4. *बच्चे का माहौल बदलें*  

    बच्चे को बिजी रखें ताकि उसका ध्यान मिट्टी से हटे। कलरिंग, ब्लॉक गेम्स, क्ले से खेलने दें। अगर बच्चा बोरियत या अटेंशन के लिए खा रहा है, तो उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं।

 

5. *साफ-सफाई रखें*  

    बच्चे के नाखून हमेशा छोटे रखें। बाहर से आने के बाद और खाने से पहले साबुन से हाथ जरूर धुलवाएं। घर की दीवारों का उखड़ा पेंट ठीक कराएं।

 

*सबसे जरूरी बात याद रखें*

बच्चा मिट्टी इसलिए नहीं खाता कि उसे स्वादिष्ट लगती है। वो इसलिए खाता है क्योंकि उसका शरीर अंदर से मदद मांग रहा है। डांटने से वो छुपकर खाएगा और आपसे डरेगा।

 

*पिका का इलाज संभव है।* सही जांच और आयरन की दवा शुरू होने के 1-2 महीने के अंदर ही ज्यादातर बच्चों की ये आदत छूट जाती है।

 

इसलिए चिंता नहीं, एक्शन लें। आज ही अपने डॉक्टर से बात करें।

 

यह जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। हर बच्चे की स्थिति अलग होती है। कोई भी दवा या टेस्ट शुरू करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

 

Kanchan Sabharwal 

Holistic Nutritionist and Weight Manegement Guide 

9463036132


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