Sun, 01 Nov 2026
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पंजाब के बेअदबी कानून को हाईकोर्ट में चुनौती, याचिका दायर

पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए बेअदबी कानून को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। जालंधर के रहने वाले सिमरनजीत सिंह ने इस कानून को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है।

कानून की वैधता पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार ने इस कानून में बेहद सख्त प्रावधान शामिल किए हैं, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका तर्क है कि इस तरह के कानून को लागू करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी लेना आवश्यक होता है।

‘धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ’
सिमरनजीत सिंह ने दलील दी कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, ऐसे में कोई भी कानून किसी एक धर्म विशेष के लिए नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह एक्ट सेकुलर मूल्यों के अनुरूप नहीं है और सभी धर्मों के लिए समान सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

संविधान की धारा 254 का हवाला
याचिका में संविधान की धारा 254 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यदि कोई राज्य कानून केंद्र के कानून के विपरीत जाता है, तो उसे राष्ट्रपति की मंजूरी अनिवार्य रूप से लेनी होती है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सख्त सजा से जुड़े इस कानून को बिना मंजूरी लागू करना नियमों के खिलाफ है।

20 अप्रैल को लागू हुआ कानून
पंजाब सरकार ने 20 अप्रैल 2026 को आधिकारिक गजट में नोटिफिकेशन जारी कर इस कानून को लागू किया था। इसके तहत बेअदबी के मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और 5 लाख से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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