Thu, 05 Nov 2026
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पंजाब पुलिस के एनकाउंटर दावों पर हाईकोर्ट का बड़ा हमला, DGP को दी 2 हफ्ते की मोहलत

पंजाब में रणजीत सिंह एनकाउंटर मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। आज हुई अहम सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए और डीजीपी गौरव यादव को जवाब तलब किया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायपालिका अपनी आंखें बंद करके नहीं बैठ सकती। हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को अगले दो सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का सख्त आदेश दिया है।

हर एनकाउंटर की कहानी एक जैसी ही क्यों होती है?
सुनवाई के दौरान पंजाब के डीजीपी गौरव यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। पुलिस की ओर से दलील दी गई कि हथियारों की रिकवरी के समय 3 से 4 पुलिसकर्मी साथ थे, जिस दौरान एनकाउंटर हुआ। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर पुलिस की हर एनकाउंटर की कहानी एक जैसी ही क्यों होती है?

इस पर वकील तनु बेदी ने कोर्ट को जानकारी दी कि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच पंजाब में कुल 34 एनकाउंटर हुए हैं और लगभग सभी की पटकथा एक समान है। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि मारा गया रणजीत सिंह महज 18-19 साल का युवक था, जो मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।

SIT का गठन और अगली सुनवाई की तारीख
कोर्ट की फटकार के बीच डीजीपी ने जवाब दिया कि इस एनकाउंटर मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि मामला सीजेएम (CJM) गुरदासपुर के संज्ञान में है और इसकी गहराई से छानबीन की जा रही है।

हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को दो टूक शब्दों में कहा है कि 17 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई तक पूरी रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने साफ किया कि मानवाधिकारों और पुलिस की कार्यप्रणाली के बीच संतुलन जरूरी है और किसी भी संदिग्ध एनकाउंटर को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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