चंद्रमा को भले ही ग्रहण लगा हो,
पर वह ग्रहण ही तो है —
क्षणिक, अस्थायी, गुजर जाने वाला।
आकाश का चाँद अपनी शीतलता नहीं खोता,
उसी प्रकार सत्य अपनी आभा नहीं खोता।
होलिका की अग्नि प्रचंड थी,
पर प्रह्लाद का विश्वास उससे भी अधिक प्रखर।
असत्य, अहंकार और अन्याय
कुछ समय के लिए छाया अवश्य कर सकते हैं,
परंतु उनकी आयु लंबी नहीं होती।
ग्रहण छंटता है,
अंधकार हटता है,
और फिर उजाला ही उजाला होता है।
आइए, इस होली पर संकल्प लें —
हम सत्य, विश्वास और करुणा के पक्ष में खड़े रहेंगे।
क्योंकि अंततः विजय सदैव प्रकाश की ही होती है।
आप सभी को होलिका दहन एवं होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आने वाला कल आनंद, विश्वास और नई आशा लेकर आए। ????✨ सुरेन्द्र दुबे 9425179527


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