Wed, 18 Mar 2026
G2M is a social Media platform which is designed for journalists, bloggers, and content creators Join it G2M is a social Media platform which is designed for journalists, bloggers, and content creators Join it

फटे जूते फटे पहन के आकाश पे चढ़े थे सपने हमारे हरदम औकात से बड़े थे

पानी में भी चाँद सितारे उग आते हैं
आँख से दिल तक वो ज़रख़ेज़ी हो जाती है
हैदर क़ुरैशी

उड़ गए सारे परिंदे मौसमों की चाह में
इंतिज़ार उन का मगर बूढे शजर करते रहे
अंबरीन हसीब अंबर

तू अपनी शीशागरी का हुनर ना कर जाया,
मैं आईना हूँ मुझे टूटने की आदत है |
अहमद फराज

हमने अपनी मुफलिसी का कुछ इस तरह रखा भरम,
वास्ते कम कर लिये मगरूर कहलाने लगे |
मुनीश महबूब 

एक भी उम्मीद की चिट्ठी इधर आती नहीं
हो न हो अपने समय का डाकिया बीमार है
कुँवर बेचैन

फटे जूते फटे पहन के आकाश पे चढ़े थे
सपने हमारे हरदम औकात से बड़े थे
मनोज मुंतशिर 

वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था
दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से
कैफ़ भोपाली

जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है
हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं
जमुना प्रसाद राही


168

Share News

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 147403