वाह किस्मत हो तो ऐसी! जालंधर में व्यक्ति ने पहली बार लॉटरी खरीदी और बन गया मालामाल
---------- पंचमुखी श्री हनुमान जी ----------
हनुमान जी के मूल रुप से हटकर 4 अतिरिक्त मुख का संबंध जगत के पालनहार भगवान विष्णु से है सिंह मुख विष्णु के नरसिंह अवतार का प्रतिरूप है वराह मुख उनके यज्ञवराह स्वरूप का और अश्व मुख उनके हयग्रीव अवतार का प्रतिरूप है वरुण का मुख विष्णु जी के वाहन और प्रिय सेवक गरुत्मान का प्रतिनिधिहै हनुमान जी स्वयं रुद्रावतार हैं इसलिए उसे शंकर सुवन कहा जाता है पंचमुखी हनुमान जी अपनी संपूर्णता में हरी हरात्मक हैं तथा भगवान शंकर और भगवान विष्णु के आशीर्वाद से विभूषित हैं पंचमुखी हनुमान जी की उपासना करते हुए साधक मारुति नंदन विष्णु और शिव का भी सम्मिलित रूप से उपासना करता है इन तीनों देव की कृपा उसे पंचमुखी हनुमान जी की उपासना से प्राप्त हो जाता है भगवान विष्णु के नरसिंह रूप की उपासना शत्रुओं के दमन एवं अकाल मृत्यु के दोष निवारण के लिए वैष्णो में व्यापक रूप से की जाती है सांसारिक कामनाओं की पूर्ति के लिए तथा अष्ट सिद्धि के लिए तांत्रिक नरसिंह है की उपासना करते हैं नरसिंह रूप की उग्रता को कम करने और परिणामों को अनुकूल बनाने के लिए साधना के समय लक्ष्मी जी का आवाहन भी कर लिया जाता है लक्ष्मी नृसिंह कि यह सम्मिलित उपासना दक्षिण भारत में विशेष रूप से प्रचलित है । इसकी की चर्चा ब्रह्म पुराण आदि प्राचीन ग्रंथों में विस्तार से मिलती है नरसिंह उपासना का सर्वाधिक प्रभावशाली मंत्र ,मंत्र राज नर्सिंग तंत्र है जिसमें भगवान नृसिंह को उग्र महाविष्णु तेजस्वी सर्वव्यापी भयंकर और काल को भी काल कलवित कर देता है पंचमुखी हनुमान जी में नरसिंह भगवान की शक्ति और सामर्थ्य समाहित है उनका यह स्वरूप उग्र धर्म तेजस्वी भीषण भयानक भक्तों के लिए दयालु और कल्याणकारी है ।
:योगीराज रमेश जी महाराज

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