Friday, 30 Jan 2026

पंच-अग्नि की सजगता से सेवा सम्भाल करनी चाहिए : योगिराज रमेश

पन्चाग्न्यो मनुष्येण परिचर्या: प्रयत्नत:। 
पिता माताग्निरात्मा च गुरुश्च भरतर्षभ ॥

                    ॐॐ
 माता, पिता, अग्नि, आत्मा और गुरु इन्हें पंचाग्नी कहा गया है।

मनुष्य को इन पाँच प्रकार की अग्नि की सजगता से सेवा-सुश्रुषा करनी चाहिए । इनकी उपेक्षा करके हानि होती है ।


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