वाह किस्मत हो तो ऐसी! जालंधर में व्यक्ति ने पहली बार लॉटरी खरीदी और बन गया मालामाल
मुझे दुश्मन से अपने इश्क़ सा है
मैं तन्हा आदमी की दोस्ती हूँ
बाक़र मेहदी
दोस्ती ख़्वाब है और ख़्वाब की ता'बीर भी है
रिश्ता-ए-इश्क़ भी है याद की ज़ंजीर भी है
अज्ञात
किसी-किसी को अता होती है ये दौलत भी
किसी-किसी को ख़ुदा अच्छे दोस्त देता है.
आदिल रशीद
मैं चलते-चलते इतना थक गया हूँ..चल नहीं सकता
मगर मैं सूर्य हूँ..संध्या से पहले ढल नहीं सकता.
कुंवर बेचैन
दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था
जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था
मीर हसन
तेरी तरह आसान नहीं वापसी मेरी
मैं रास्तों को समझता हुआ नहीं आया
Sharik kaifi

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