Fri, 30 Oct 2026
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काव्य संकलन "श्रुता"

मुझे दुश्मन से अपने इश्क़ सा है

मैं तन्हा आदमी की दोस्ती हूँ

बाक़र मेहदी

 

दोस्ती ख़्वाब है और ख़्वाब की ता'बीर भी है

रिश्ता-ए-इश्क़ भी है याद की ज़ंजीर भी है

अज्ञात

 

किसी-किसी को अता होती है ये दौलत भी

किसी-किसी को ख़ुदा अच्छे दोस्त देता है.

आदिल रशीद

 

मैं चलते-चलते इतना थक गया हूँ..चल नहीं सकता

मगर मैं सूर्य हूँ..संध्या से पहले ढल नहीं सकता.

कुंवर बेचैन

 

दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था

जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था

मीर हसन

 

तेरी तरह आसान नहीं वापसी मेरी

मैं रास्तों को समझता हुआ नहीं आया

Sharik kaifi

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