Friday, 30 Jan 2026

काव्य संकलन "श्रुता"

बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं

कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं

इरफ़ान सिद्दीक़ी

 

मौत का भी इलाज हो शायद

ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं

फ़िराक़ गोरखपुरी

 

जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने

इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने

शहरयार

 

ये क्या है मोहब्बत में तो ऐसा नहीं होता

मैं तुझ से जुदा हो के भी तन्हा नहीं होता

शहरयार

 

एक महफ़िल में कई महफ़िले होती हैं शरीक 

जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा |

निदा फ़ाज़िली


128

Share News

Login first to enter comments.

Latest News

Number of Visitors - 132978