फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट में मची अफरा-तफरी, अचानक नीचे आने लगा विमान
मैं रौशनी हूँ तो मेरी पहुँच कहाँ तक है
कभी चराग़ के नीचे बिखर के देखूँगी
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
अजीब लुत्फ़ था नादानियों के आलम में
समझ में आईं तो बातों का वो मज़ा भी गया
अनवर मसूद
सुना है सच्ची हो नीयत तो राह खुलती है
चलो सफ़र न करें कम से कम इरादा करें
मंज़ूर हाशमी
खींच लाया तुझे एहसास-ए-मोहब्बत मुझ तक
हम-सफ़र होने का तेरा भी इरादा कब था
अमीता परसुराम मीता





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