वाह किस्मत हो तो ऐसी! जालंधर में व्यक्ति ने पहली बार लॉटरी खरीदी और बन गया मालामाल
( कविता )
जीवन
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पतझड़ आता है
पत्ते झड़ कर
बिखरते हैं
पीले पड़ कर
वृक्ष आहत तो
होता होगा
टूटे मुर्झाए पत्तों
को देख
जीवन को
बिखरने नहीं देता
फिर से
हरा होता है
ज़ख़्मों की
पीड़ा को
पी जाता है
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- देविन्दर बिमरा

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