बिहार कांग्रेस बचाओ” महासम्मेलन आयोजित, समर्पित कांग्रेसियों ने प्रदेश नेतृत्व पर बोला तीखा हमला ।
इश्क़ में राय बुज़ुर्गों से नहीं ली जाती
आग बुझते हूए चूल्हों से नहीं ली जाती
- मुनव्वर राना
सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं
जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं
ज़िंदगी को भी सिला कहते हैं कहने वाले
जीने वाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं
फ़ासले उम्र के कुछ और बढ़ा देती है
जाने क्यूँ लोग उसे फिर भी दवा कहते हैं
चंद मासूम से पत्तों का लहू है 'फ़ाकिर'
जिस को महबूब की हाथों की हिना कहते हैं
- सुदर्शन फ़ाकिर
जब थे कम-उम्र समझदार नहीं होते थे
उन दिनों लोग अदाकार नहीं होते थे
अब तो वो लोग भी मिलने को चले आते हैं
बात करने को जो तय्यार नहीं होते थे
कुछ घरों में कोई रहता ही नहीं था अफ़सोस
कुछ घरों के दर-ओ-दीवार नहीं होते थे
- आरिब हाशमी
मेरे रोने की हक़ीक़त जिसमें थी
एक मुद्दत तक वो काग़ज़ नम रहा
- मीर तक़ी मीर


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