सुबह-सुबह बाइक पर निकले चन्नी, सतलुज किनारे जो देखा उसे लेकर लगाए बड़े आरोप
तेरे ख्वाबों में बीती हैं
मेरी रातें ,
और
यादों में कटे हैं दिन ।
जिनमें से कुछ ...
तेरे साथ हैं ,
और कुछ ....
....... तेरे बिन
तेरी यादें ...
मेरा सरमाया हैं ।
डरती हूं ...
वक्त की दीमक कहीं
मेरी यादों को न खा जाए .....
*श्रृता????*





Comments
No comments yet.