Tue, 04 Aug 2026
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काव्य संकलन "श्रुता"

आदमी आदमी भी होता है 

सिर्फ़ अच्छा बुरा नहीं होता।

 

आदिल रज़ा मंसूरी

 

कौन कहता है की सोहबत पाकर शख्स कोई भी बदल जाता है।

मीठी नदियाँ हज़ार पीकर भी इक समुंदर सदा खारा ही रहा।।

 

प्रताप सोमवंशी

 

जंगलों को काट कर कैसा ग़ज़ब हम ने किया 

शहर जैसा एक आदम-ख़ोर पैदा कर लिया 

 

फ़रहत एहसास

 

नफ़स नफ़स पे यहां रहमतों की बारिश है

है बदनसीब जिसे ज़िन्दगी ना रास आई।

 

पयाम फतेहपुरी

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