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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सलवाद’ वाले बयान पर सवाल उठाए हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में जायज असहमति को नक्सलवाद के दायरे में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने इस संबंध में एक आर्टिकल शेयर करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को स्पष्ट करने की मांग की है।
कैप्टन बोले- ‘दिमागी नक्सल’ और असहमति के बीच सीमा स्पष्ट हो
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री किसी वर्ग को ‘पहचानने’ और ‘अलग-थलग’ करने की बात करते हैं, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि ‘दिमागी नक्सल’ और जायज असहमति के बीच सीमा रेखा क्या है। उन्होंने कहा कि ‘नक्सल’ जैसे शब्द का इस्तेमाल हल्के तरीके से नहीं किया जाना चाहिए।
उनके मुताबिक भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। दोनों के बीच सही संतुलन बनाया जा सकता है और सही तरीके से समझे जाने पर राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक आजादी एक-दूसरे को मजबूत करती हैं।
माओवादी हिंसा का समर्थन करने वालों पर हो स्पष्टता
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अगर ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जा रहा है जो जानबूझकर माओवादी हिंसा को बढ़ावा देते हैं, तो इस अंतर को स्पष्ट किया जाना चाहिए। लोकतंत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा बेहद जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर जायज असहमति को नक्सलवाद के दायरे में नहीं रखा जा सकता। उनके अनुसार इस मामले में एक स्पष्ट ‘लक्ष्मण रेखा’ खींचने की जरूरत है।
PM मोदी ने लाल किले से किया था ‘दिमागी नक्सलवाद’ का जिक्र
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सलवाद’ से बचने की बात कही थी। इसी संदर्भ में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अब सवाल उठाते हुए इस शब्द की स्पष्ट परिभाषा बताने की मांग की है। कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले कांग्रेस में रहते हुए भी पार्टी हाईकमान के फैसलों पर खुलकर सवाल उठाते रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री रहते हुए भी वह कई मौकों पर राहुल गांधी के बयानों से अलग अपना रुख सार्वजनिक रूप से जाहिर कर चुके हैं।
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