Thursday, 29 Jan 2026

विश्लेषण : खून से लथपथ नए साल का पहला हफ्ता : क्या खौफ के साये में है पंजाब?

4 दिन और 4 सनसनीखेज वारदातें साल 2026 की शुरुआत पंजाब के लिए खुशियों के बजाय मातम और दहशत लेकर आई है। कैलेंडर के पन्ने अभी ठीक से पलटे भी नहीं थे कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आती गोलियों की गूंज ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। 

2 जनवरी से लेकर 5 जनवरी तक, यानी महज 96 घंटों के भीतर पंजाब ने चार ऐसी हत्याएं देखी हैं, जिन्होंने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। कपूरथला में एक एनआरआई महिला की हत्या से शुरू हुआ यह सिलसिला मोगा, अमृतसर और लुधियाना तक पहुंच गया है। यह केवल अपराध का आंकड़ा नहीं है, बल्कि उस गिरती कानून-व्यवस्था का प्रमाण है जिसे संभालने का दावा सरकार बार-बार करती रही है।

अपराध का पैटर्न: घर से लेकर शादी समारोह तक कहीं भी सुरक्षा नहीं
इन हत्याओं के तरीके पर गौर करें तो एक डरावना पैटर्न सामने आता है। अब अपराधी अंधेरे का इंतजार नहीं करते, बल्कि दिनदहाड़े और सार्वजनिक स्थानों पर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। 2 जनवरी को कपूरथला में कनाडा से लौटी एनआरआई महिला की उसके घर में घुसकर हत्या कर दी गई। 

अगले ही दिन मोगा में एक पूर्व पंचायत सदस्य को गोलियों से छलनी कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब 4 जनवरी को अमृतसर के एक मैरिज पैलेस में चल रही शादी के बीच आम आदमी पार्टी के ही एक सरपंच की सरेआम हत्या कर दी गई। इसके बाद 5 जनवरी को जगराओं में एक कबड्डी खिलाड़ी को मौत के घाट उतार दिया गया। ये घटनाएं बताती हैं कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है।

सियासी रंजिश और गैंगस्टरों का बोलबाला
इन हत्याओं के पीछे कहीं न कहीं जमीनी स्तर की राजनीति और गैंगस्टरों के नेटवर्क की बू आ रही है। मोगा और अमृतसर की वारदातों में जिस तरह से ताबड़तोड़ फायरिंग की गई, वह गैंगस्टरों की कार्यप्रणाली की ओर इशारा करती है। अमृतसर में तो हत्या की जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर ली जा रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पंजाब में अब 'गन कल्चर' और 'गैंगस्टर राज' हावी हो गया है। जब सत्ताधारी दल का अपना सरपंच ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता खुद को सुरक्षित कैसे महसूस कर सकती है? यह सवाल आज पंजाब के हर नागरिक के जेहन में है।

लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल: क्या बेबस नजर आ रही है पुलिस? 
पंजाब पुलिस अपनी बहादुरी के लिए जानी जाती है, लेकिन मौजूदा हालात में वह केवल 'इन्वेस्टिगेशन मोड' में नजर आ रही है। हर वारदात के बाद जांच की टीम गठित की जाती है, सीसीटीवी खंगाले जाते हैं और आरोपियों को जल्द पकड़ने का दावा किया जाता है, लेकिन अपराध को रोकने की 'प्रिवेंटिव' रणनीति कहीं दिखाई नहीं दे रही। इंटेलिजेंस फेल्योर और सड़कों पर पुलिस की ढीली गश्त ने अपराधियों को खुलेआम घूमने का हौसला दिया है। जब अपराधी भीड़भाड़ वाले शादी समारोहों में हथियार लेकर घुस जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की नाकामी को दर्शाता है।

भगवंत मान सरकार के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा
मुख्यमंत्री भगवंत मान, जिनके पास गृह विभाग की भी जिम्मेदारी है, इस वक्त कड़े सवालों के घेरे में हैं। विपक्षी नेता प्रताप सिंह बाजवा और हरसिमरत कौर बादल लगातार सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगा रहे हैं। सरकार की ओर से दलील दी जाती है कि पिछली सरकारों के बोए हुए कांटों को वे साफ कर रहे हैं, लेकिन सत्ता में आने के इतने समय बाद भी जनता यह तर्क सुनने को तैयार नहीं है। जनता को परिणाम चाहिए। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को सख्त निर्देश तो दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर तब तक नहीं दिखेगा जब तक कि अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुँचते और इस तरह की वारदातों पर पूर्ण विराम नहीं लगता।

सुधार की दरकार: केवल दावों से नहीं, कार्रवाई से बनेगी बात
पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, जहां शांति बनाए रखना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है। वर्तमान परिदृश्य में सरकार को न केवल गैंगस्टरों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनानी होगी, बल्कि अवैध हथियारों की तस्करी और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा मानकों को भी कड़ा करना होगा। पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त कर उसे पेशेवर तरीके से काम करने की छूट देनी होगी। यदि इस रक्तरंजित सिलसिले को यहीं नहीं रोका गया, तो पंजाब की छवि को जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई करना नामुमकिन हो जाएगा।


17

Share News

Login first to enter comments.

Latest News

Number of Visitors - 132720