Sun, 18 Oct 2026
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इंडोनेशिया में ईंधन की किल्लत से हड़कंप, कहीं 3 घंटे इंतजार तो कहीं एक किलोमीटर लंबी लाइन

इंडोनेशिया के मशहूर पर्यटन स्थल बाली में पेट्रोल-डीजल की कमी से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जबकि कुछ स्टेशनों पर ईंधन खत्म होने के कारण ‘क्षमा करें, ईंधन उपलब्ध नहीं है’ के बोर्ड लगा दिए गए हैं। यह समस्या केवल बाली तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडोनेशिया के 11 प्रांतों में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने की खबर है। पश्चिमी सुमात्रा में लोगों को ईंधन के लिए 2 से 3 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि बैंटन में डीजल खरीदने के लिए मेराक-तंगेरांग हाईवे पर करीब एक किलोमीटर लंबी कतार लग गई। इस संकट से स्थानीय निवासियों के साथ पर्यटन और परिवहन से जुड़े कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं।

11 प्रांतों में ईंधन की किल्लत, कई जगह डीजल-पेट्रोल खत्म
इंडोनेशिया के कई हिस्सों में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, आचे, रियाउ, पश्चिमी कालीमंतन, दक्षिणी सुलावेसी, उत्तरी सुलावेसी और योग्याकार्ता में डीजल या पर्टालाइट पेट्रोल की कमी सामने आई है। वहीं, पश्चिमी सुमात्रा और बैंटन में ईंधन भरवाने के लिए लोगों को काफी देर तक कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है।

बाली जैसे पर्यटन पर निर्भर द्वीप में इस स्थिति का असर खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी आने-जाने के लिए वाहनों पर निर्भर रहते हैं।

सप्लाई में देरी बनी संकट की वजह, टैंकर में आई तकनीकी खराबी
इंडोनेशिया के ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय के तेल एवं गैस महानिदेशक लाओडे सुलेमान के मुताबिक, मौजूदा संकट की मुख्य वजह स्थानीय स्तर पर ईंधन वितरण में आई बाधाएं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमी का कारण ईंधन की कुल आपूर्ति में गिरावट या वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल नहीं है।

बाली पहुंचने वाले एक ईंधन टैंकर में ईंधन उतारने की तैयारी के दौरान तकनीकी खराबी आ गई थी। इससे द्वीप के प्रमुख ईंधन टर्मिनलों तक आपूर्ति पहुंचने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि संबंधित टैंकर अब पहुंच चुका है और ईंधन की आपूर्ति 24 घंटे जारी है।

खराब मौसम और समुद्र में ऊंची लहरों से भी परिवहन प्रभावित
ईंधन की आपूर्ति में देरी की एक अन्य वजह समुद्र में खराब मौसम और ऊंची लहरें भी रहीं। इनके कारण डेनपासार के सांगगरन टर्मिनल और पूर्वी बाली के मांगगिस टर्मिनल तक ईंधन की खेप पहुंचने में बाधा आई। इन घटनाओं के चलते पेट्रोल पंपों तक ईंधन पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हुई और कई जगह कमी की स्थिति पैदा हो गई।

ईंधन खरीदने के लिए टेंडर में कम भागीदारी, आयात की लागत बढ़ी
इंडोनेशिया के तेल एवं गैस महानिदेशक के मुताबिक, ईंधन की आपूर्ति के लिए आयोजित होने वाली निविदाओं में अब कम कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इसके चलते सरकार को उन देशों से सीधे ईंधन खरीदना पड़ रहा है, जिनके पास अतिरिक्त भंडार उपलब्ध है। इस व्यवस्था में सरकार को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इंडोनेशिया के ईंधन आयात के करीब 25 प्रतिशत स्रोत प्रभावित होकर खत्म हो गए। ऐसे में वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर निर्भरता बढ़ने से ईंधन खरीदने की प्रक्रिया और महंगी हो गई है।

सस्ता पर्टालाइट पेट्रोल बना ज्यादा मांग की वजह
इंडोनेशिया में सरकारी सब्सिडी वाला पर्टालाइट पेट्रोल बिना सब्सिडी वाले ईंधन की तुलना में काफी सस्ता है। इसी कारण इसकी मांग अधिक रहती है। ईंधन की कमी की आशंका के बीच कई वाहन चालकों ने जरूरत से ज्यादा पेट्रोल खरीदना शुरू कर दिया। इस पैनिक-बाइंग के कारण कुछ पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन का भंडार तेजी से खत्म होने लगा और आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया।

कई स्टेशनों पर कर्मचारियों को ईंधन उपलब्ध नहीं होने के बोर्ड लगाने पड़े। वहीं, वाहन चालक और मोटरसाइकिल सवार नई खेप आने के इंतजार में बंद पेट्रोल पंपों के बाहर खड़े रहे।

सब्सिडी वाले ईंधन की बिक्री सीमित करने की तैयारी
ईंधन संकट के बीच बाली सरकार सब्सिडी वाले ईंधन की बिक्री को लेकर नए नियमों पर विचार कर रही है। इसके तहत सबसे अधिक आय वाले 10 प्रतिशत लोगों के लिए सब्सिडी वाले ईंधन की बिक्री सीमित करने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य सस्ती दर पर उपलब्ध ईंधन की मांग को नियंत्रित करना और सब्सिडी का लाभ जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है।

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