जालंधर और लुधियाना से कटरा के लिए शुरू होगी AC बस सेवा, ट्रेनों की वेटिंग से मिलेगी राहत
पंजाब कांग्रेस में आगामी चुनाव से पहले ही आंतरिक कलह अपने चरम पर पहुंच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और पार्टी नेतृत्व के बीच चल रहा गतिरोध अब और गहरा गया है। ताजा घटनाक्रम में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल के साथ चन्नी गुट की प्रस्तावित बैठक टल गई है।
शर्तों पर फंसी बात, बैठक रद्द
बैठक के रद्द होने का मुख्य कारण चन्नी गुट द्वारा रखी गई कड़ी शर्तें थीं। चन्नी के समर्थकों ने मांग की थी कि यह बैठक कांग्रेस भवन में न होकर किसी अन्य स्थान पर हो और इसमें प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग की मौजूदगी न हो। सूत्रों के अनुसार, इन शर्तों पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई, जिसके चलते बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि यह बैठक अब अगले दिन आयोजित की जा सकती है।
राहुल गांधी से सीधे संवाद की चाहत
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चन्नी अपने पत्ते बहुत सोच-समझकर खेल रहे हैं। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे इस मामले में सीधे राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात करना चाहते हैं। चन्नी चाहते हैं कि यदि उन्हें आगामी चुनाव में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है, तो उस पर प्रभारी भूपेश बघेल के बजाय सीधे राहुल गांधी की मुहर हो। इस मुलाकात के बाद ही चन्नी अपने भविष्य की रणनीति पर कोई बड़ा फैसला लेंगे।
बघेल का चंडीगढ़ में डेरा, चन्नी का 'सरेंडर' से इनकार
इधर, भूपेश बघेल पिछले चार दिनों से चंडीगढ़ में डेरा जमाए हुए हैं, लेकिन चन्नी ने उनके सामने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। इसी बीच, चर्चा यह भी है कि बघेल का मौजूदा पांच दिवसीय दौरा और तीन दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि चरणजीत चन्नी पार्टी हाईकमान पर उस स्तर का दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। उनके बातचीत के लिए राजी होने से हाईकमान पर बना शुरूआती दबाव काफी हद तक कम हो गया है।
Comments
No comments yet.